वैज्ञानिकों की एक टीम ने दुनिया का पहला Genetically Modified मानव भ्रूण बना लिया है। न्यू यॉर्क की कोर्नेल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने यह अनोखी सफलता हासिल की। उन्होंने इस जीएम भूण को बनाकर इस बात की अध्ययन किया कि, हमारे शरीर विकास के शुरुआती दौर में हमारी कोशिकाएं और रोग किस तरह पनपते हैं।
दरअसल, जीएम भूण ऐसा भूण होता है जिसमें वैज्ञानिक मनचाहे जीन्स विकसित करते हैं। भूण या स्पर्म में डाले गए जीन्स शरीर के सभी कोशिकायों को प्रभावित करते हैं और साथ ही अगली पीढ़ी में भी पहुंच जाते हैं।शोध समूह के मुखिया निकिका जैनीनोविक के मुताबिक उन्होंने इस काम के लिए एक ऐसे भ्रूण का इस्तेमाल किया था जो कृत्रिम गर्भाधान के दौरान बच गया था। चूंकि यह महज एक प्रयोग था इसलिए वैज्ञानिकों ने एक वायरस की सहायता से इसमें हरे रंग का चमकने वाला प्रोटीन डाला। बाद में इस रिसर्च को अमेरिकन सोसायटी ऑफ रिप्रोडक्टिव मेडिसिन की मीटिंग में पेश किया गया था।
वैज्ञानिकों का दावा है कि हमारे शरीर में ट्यूमर, हीमोफीलिया और कैंसर जैसे रोगों के लिए जिम्मेदार जीन्स को इस तरह की जांच से सही किया जा सकेगा। अपने विरोधियों का जवाब देते हुए वैज्ञानिकों ने कहा है कि इस नई तकनीक से स्टेम सेल विक्सित करने और रोगों के विकास के बारे में भी अहम जानकारी मिल सकेगी। सिद्धांत रूप में अब किसी भी जीन को शरीर में विकसित किया जा सकेगा।
हालांकि इस जीएम भ्रूण को पांच दिनों के बाद ही नष्ट कर दिया गया। लेकिन इन
मामलों पर नियंत्रण रखने वाली ब्रिटिश एजेंसी Human Fertilisation and Embryology Authority (एचएफईए) ने चेतावनी दी है कि इस तरह की विवादास्पद जांच से गंभीर नैतिक और जनहित संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। नीतिशास्त्रियों ने भी आगाह किया है कि इस तरह के डिजाइनर भ्रूणों के चलन में आने के बाद लोगों में ऊंचाई, बुद्धिमानी और बालों के रंग जैसे गुणों वाले जीन्स अपने बच्चों के भूणों में डलवाने की होड़ लग जाएगी। कुल मिलाकर वे इसे प्रकृति के काम में गैरजरूरी हस्तक्षेप मानते हैं।
नवभारत टाइम्स के अनुसार, इसी सप्ताह ब्रिटेन में Human Fertilization and Embryology बिल पर दोबारा विचार होना है। इसके पास होने के बाद वहां जीएम भ्रूण बनाना वैध होगा। लेकिन इन भ्रूणों का इस्तेमाल केवल शोध में हो पाएगा, इन्हें किसी गर्भ में रोपित नहीं किया जा सकेगा। इस प्रक्रिया के विरोधियों का कहना है कि भविष्य में इस कानून को भी लचीला बना दिया जाएगा। जैनिनोविक की इच्छा है कि इन भूणों को कुछ दिन और विकसित करने की अनुमति मिलनी चाहिए जिससे जांच की सफलता की दर पता चला सके। इस बीच एचएफईए ने खुलासा किया है कि वह वैज्ञानिकों को जीएम भ्रूण विकसित करने के लिए लाइसेंसिंग की तैयारी कर रहे हैं।
अधिक जानकारी यहाँ, यहाँ और यहाँ पायी जा सकती हैं।
Wednesday, 14 May, 2008
हकीकत बना इंसान का पहला डिजायनर बेबी, अब बच्चे की बुद्धिमानी, ऊँचाई, रंग चुनिए!
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