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Friday, 26 June, 2009

छेड़छाड़ करने वाली लड़की का काम बखूबी निभाने वाला सेक्सी रोबोट तैयार

जो कुंआरे लड़के इस चिंता में दुबले हुए जाते हैं कि लड़कियां उन्हें भाव नहीं देतीं, उनकी समस्या का हल विज्ञान ने पेश कर दिया है। ऐसे लड़कों को ध्यान में रख कर सेक्सी रोबोट तैयार किया गया है। वैसे योजना तो यह है कि प्रेमिका के विकल्प के रूप में रोबोट को पेश किया जाए। लेकिन इस योजना को मूर्त रूप लेने में अभी वक्त लगेगा। फिलहाल छेड़छाड़ करने वाली लड़की का काम बखूबी निभाने वाला रोबोट तैयार है।

जापान की कंपनी सीगा टायज ने देश के कुंआरे लड़कों को ध्यान में रखते हुए खास रोबोट तैयार किया है। 15.5 इंच लंबे इस रोबोट को छरहरी लड़की का रूप दिया गया है। इसमें चुलुबुली लड़की की खूबियां भी समाहित की गई हैं। मसलन, यह रोबोट सुरीली आवाज में बात करेगा और 'किस' भी करेगा। इस रोबोट में 60 ऐसे प्रोग्राम फीड किए गए हैं, जो आम तौर पर प्यार भरी शरारत माने जाते हैं और युवा जोड़ों के बीच इस तरह की शरारत आम होती है।




(इस संदर्भ में भविष्य की कल्पना करता एक खूबसूरत वीडियो गीत)

यह रोबोट कुंआरों, तलाकशुदा और प्यार में नाकाम लड़कों को ध्यान में रख कर बनाया गया है। कंपनी ने इसकी कीमत 175 डालर यानी करीब 7,200 रुपये रुपये रखी है। उसे उम्मीद है कि वह साल में कम से कम दस हजार सेक्सी रोबोट तो बेच ही लेगी। दूसरी ओर एक विशेषज्ञ ने कहा है कि वो दिन ज्यादा दूर नहीं जब रोबोट भावनाओं से लैस प्रेमी-प्रेमिका की भूमिका निभाते नजर आएंगे। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि अगले चार दशक के अंदर ऐसे रोबोट सामने आ जाएंगे, जो लोगों के अकेलेपन के साथी बनेंगे और अपनी भावपूर्ण हरकतों से उन्हें रिझाएंगे।



हाल ही में मास्ट्रिट यूनिवर्सिटी में हुए एक सम्मेलन में 'लव+सेक्स विथ रोबोट' के लेखक डेविड लेवी ने भविष्य के रोबोट की रूपरेखा पेश की। उन्होंने कहा, ये रोबोट हर तरह की भावनाओं का इजहार करेंगे। वे आप से बात करेंगे और आपको हंसाएंगे। वे आप से प्यार करेंगे और अपने इश्क का इजहार करने के लिए 'आई लव यू' भी कहेंगे। लेवी ने बताया कि वैज्ञानिक इन दिनों रोबोट में कृत्रिम व्यक्तित्व, भावनाएं और समझ-बूझ विकसित करने पर काम कर रहे हैं।

Saturday, 20 June, 2009

एक मज़ेदार वीडियो, सन 2020 के वाहन का!?

इस ब्लॉग को अपने नाम किये जाने के बाद, आज सोचा कि इसका रंग-रूप बदला जाये। इसी क्रम में जब पुरानी ई-मेल देख रहा था तो अपने मित्र को अटैचमेंट में भेजा गया एक वीडियो दिखा। अब पता नहीं मुझे यह कहाँ से मिला था। इसमें एक कल्पना की गयी है कि पार्किंग के दु:स्वप्न से उबरने के लिये भविष्य के वाहन कैसे होंगे या फिर, होने चाहिये।

वीडियो रोचक लगा। रंग-रूप बाद में बदला जा सकता है इसलिये आपसे साझा करने के लिये तुरंत यू-ट्यूब पर अपलोड किया और अब आपके सामने है यह मज़ेदार वीडियो।





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Sunday, 7 June, 2009

बीबी से हैं परेशान! ऐसा रोबोट ले आईये श्रीमान!!

अपने लिए पत्नी ढूंढने में नाकाम रहे कनाडा निवासी एक पूर्व सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर जापानी व्यक्ति ली ट्रंक ने अपने लिए एक रोबोटिक पत्नी तैयार की है। यह रोबोट उसके पसंदीदा पेय को याद रखती है, घर की साफ-सफाई करती है, घरखर्च का हिसाब-किताब भी रखती है। खाने में क्या हो, यह सुझाव देने से लेकर अखबार की सुर्खियां सुनाना भी इसकी दिनचर्या में शामिल है। ली ट्रंक ने इस रोबोट को बनाने के लिए अपनी समस्त जमापूंजी खर्च कर दी है। यही नहीं उसके सभी क्रेडिट कार्ड खाली हो गये हैं क्योंकि स्टार वार्स फिल्म से प्रभावित ली (33) ने रेशमी बालों वाली आइको को तैयार करने के लिए 14 हजार पाउंड (लगभग 10 लाख रूपये) खर्च किए हैं।


ली ट्रंक के अनुसार विज्ञान और सुन्दरता का मेल आइको 20 वर्ष की है। उसके बाल सुनहरे हैं और वह अंग्रेजी और जापानी भाषा के 13 हजार वाक्य बोलने में सक्षम है। ली ट्रंक ने मीडिया को बताया है कि वह चाहता था कि आइको मानव की तरह स्पर्श को महसूस करे और मानव जैसी ही दिखे, और इसमें वह कामयाब रहा है। अब ली ट्रंक खुश है क्योंकि उसकी रोबोटिक पत्नी उससे बात करती है, उसका काम करती है और उसके परिवारवालों को देख कर उन्हें नमस्कार करना भी कभी नहीं भूलती।




(आइको के साथ समय बिताते उसके 'पति' का एक वीडियो)

दरअसल, ली काम में इतने व्यस्त रहते थे कि उन्हें अपने लिए पार्टनर ढूंढने का वक्त ही नहीं मिला। इसलिए, उन्होंने नवीनतम तकनीक से रोबोट के रूप में अपने लिए एक आदर्श लाइफ-पार्टनर तैयार कर ली है। हालांकि इसके साथ ली का रिश्ता बेडरूम तक नहीं पहुंचा है, लेकिन चुटकियों में ही यह काम भी हो सकता है।

20 साल की युवती जैसी दिखने वाली आइको की फिगर 32-23-33 है। यह प्यार और दुख के भावों कुदरती रूप में बयां कर सकती है। ली की कोशिश है कि इसमें कुछ और सुधार कर इंसानी शक्ल देंगे। यह चेहरों को आसानी से पहचानती है, जब भी ली के परिवार का कोई सदस्य घर में आता है तो वह हैलो कहकर अभिवादन करती है। यह लगातार 24 घंटे काम करने में सक्षम है।

अब ली ट्रंक कुछ प्रायोजक ढूंढ रहा है ताकि आइको पर और खर्चा किया जा सके और उसे और बेहतर बनाया जा सके। आप चाहें तो ट्विटर पर इसके प्रोफाईल में जायें, इस प्रोजेक्ट की वेबसाईट पर जा कर इसकी पूरी जानकारी ले सकते हैं, आइको के कई वीडियो देख सकते हैं, फोटो गैलरी देख सकते हैं, इसे बनाये जाने की तकनीक से परिचित हो सकते हैं, आइको के लिए कपड़े या फिर कम से कम 1 डॉलर का दान दे कर एक इतिहास के बनने में भागीदारी निभा सकते हैं।

क्या ख्याल है!?

Friday, 5 June, 2009

अब आया सेक्स परिवर्तन के लिए सॉफ्टवेयर

अब सेक्स परिवर्तन के लिए बाजार में आ रहा है एक सॉफ्टवेयर। ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने एक ऐसे सॉफ्टवेयर का विकास करने का दावा किया है, जो बस व्यक्ति की बातचीत का लाइव वीडियो फीड लेगा और कर देगा सेक्स परिवर्तन। इस अनूठे सॉफ्टवेयर का विकास ब्रिटेन के ईस्ट एंग्लिया विश्वविद्यालय के कम्प्यूटर वैज्ञानिक बैरी जॉन थियोबाल्ड और न्यूजीलैंड के वेटा डिजिटल के इयान मैथ्यू ने किया। मैथ्यू अब कारनेगी मेलन विश्वविद्यालय में हैं। न्यू साइंटिस्ट ने वैज्ञानिकों के हवाले से यह रिपोर्ट प्रकाशित की है।


इसके अनुसार वैज्ञानिकों का दावा है कि उनका सॉफ्टेवयर बातचीत करते किसी व्यक्ति का लाइव वीडियो फीड ले सकता है और उसे इस तरह बदल सकता है, जैसे वह कोई और व्यक्ति हो। सॉफ्टवेयर से उसके रंग, रूप और आवाज में परिवर्तन आ जाएगा। यह परिवर्तन इस कदर होगा कि लाइव वीडियो फीड का व्यक्ति मूल पुरूष से बदल कर स्त्री दिखे।

रिपोर्ट के अनुसार अपने अनुसंधान के क्रम में वैज्ञानिकों ने स्वयंसेवकों के वीडियो रिकॉर्ड किए, जिनमें उनके चेहरे की 30 भिन्न मुद्राएँ शामिल थीं। किसी में वे नाराजगी जता रहे थे तो किसी में वे मुस्कुरा रहे थे तो किसी में वे भाव-विभोर दिख रहे थे।

रिपोर्ट में बताया गया कि वीडियो की रिकॉर्डिंग का यह काम पूरा करने के बाद उनके चेहरों की प्रमुख विशिष्टताओं मसलन आँख, नाक और ओंठों के किनारों की अवस्थितियों को चिह्नित किया गया और उनकी लेबलिंग की गई। रिपोर्ट के अनुसार इस वीडियो फुटेज का अब उपयोग सॉफ्टवेयर को इस सेट में पेश किए गए प्रत्येक व्यक्ति के चेहरे को पहचानने के लिए प्रशिक्षित किया गया। एक बार किसी व्यक्ति पर प्रशिक्षित किए जाने के बाद यह वीडियो फुटेज में उनके चेहरे की हर भाव-भंगिमा को ट्रैक कर सकता है।

('सेक्स परिवर्तन' के सॉफ्टवेयर का एक प्रदर्शन )

रिपोर्ट के अनुसार इन भाव भंगिमाओं को किसी ज्ञात चेहरे पर चिपकाया जा सकता है। इस पूरी प्रक्रिया के लिए जटिल गणना की जाती है कि कैसे हर भाव-भंगिमा को दूसरे चेहरे की विशिष्टताओं के अनुरूप रूपांतरित किया जाए।

बहरहाल, तेज कम्प्यूटर के दौर में ऐसी गणनाएँ बहुत कठिन नहीं हैं। इसमें समय भी ज्यादा नहीं लगता। अनुसंधानकर्ताओं ने इसमें जिन कम्प्यूटरों का उपयोग किया, उनमें इस प्रक्रिया को पूरा करने और रूपांतरित चेहरे को प्रदर्शित करने में महज 150 मिली सेकंड लगे।

अधिक जानकारी यहाँ तथा यहाँ पायी जा सकती है।

Saturday, 21 February, 2009

निकट भविष्य में यह वायरस समूचे विश्व में फैल सकता है

रूस में इन दिनों एक मोबाइल वायरस का आतंक है, जो फर्जी SMS के जरिए लोगों के Bank Account पर कब्जा कर उसमें जमा रकम साफ कर देता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि निकट भविष्य में यह वायरस समूचे विश्व में फैल सकता है। फिलहाल रूस में ही देखा जा रहा यह वायरस हाल ही में इंडोनेशिया के एक मोबाइल फोन पर भी देखा गया, जिसके चलते विशेषज्ञ चिंतित हैं। Russia Today टीवी में मास्को स्थित Kaspersky Lab के वायरस विशेषज्ञ डेनिस मासलेनिकोव के हवाले से कहा गया है, 'मोबाइल उपभोक्ताओं का अनधिकृत संचालन भविष्य में रफ्तार पकड़ सकता है और समूची दुनिया में फैल सकता है।'

यह वायरस अनधिकृत तरीके से किसी व्यक्ति के मोबाइल एकाउंट पर कब्जा जमा लेता है। इसके बाद Mobile Banking की सेवा उपलब्ध कराने वाले नंबर पर SMS भेजा जाता है, जिसमें व्यक्ति के एकाउंट से पैसा ट्रांसफर करने की गुजारिश की जाती है। यह अनाम वायरस पीड़ित व्यक्ति के मोबाइल एकाउंट पर कब्जा जमा लेता है और उससे रकम साफ कर देता है। Symbian OS और Money Transfer की सुविधा वाले मोबाइल को इस वायरस से सबसे ज्यादा खतरा है।

मूल समाचार यहाँ पढ़ा जा सकता है।

Sunday, 15 February, 2009

2012 तक कारें आपस में बातें करेंगीं

वैज्ञानिकों ने रेडियो आधारित एक ऐसी तकनीक विकसित की है जिसके सहारे कारें आपस में 'बातचीत' कर सकेंगी। संभावित दुर्घटनाओं का विश्लेषण करेंगी और चालक को सलाह भी देंगी। आस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों के एक दल ने यह रेडियो तकनीक विकसित की है। यह तकनीक संभावित दुर्घटना, पिछले हिस्से से होने वाली टक्कर और लेन बदलाव के बारे में कार के चालकों को चेतावनी देने में भी सक्षम होगी। रोजमर्रा के वाहनों में यह जल्दी ही उपलब्ध हो सकती है। वैज्ञानिकों की माने तो 2012 तक ऐसी कारें सड़कों पर दौड़ने लगेंगी।


इतना ही नहीं, वैज्ञानिकों ने इस तकनीक के बारे में बताया कि यह यातायात का प्रबंधन करेगी, चालकों के लिए बेहतर रास्ता चुनेगी, यातायात की भीड़ को कम करने में मददगार होगी और यह ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को भी कम करेगी। UniSA Telecommunication Research Institute के प्रमुख वैज्ञानिक प्रोफेसर एलेक्स ग्रांट ने कहा कि GPS और Wi-Fi Communication की मदद से इस रेडियो तकनीक को विकसित किया गया है। वाहनों को आपस में प्रभावी रूप से बातचीत करने में यह मददगार साबित होगी।

कुछ और जानकारियों के लिए यहाँ, यहाँ या यहाँ जाया जा सकता हैं।

Thursday, 12 February, 2009

अब आया सच में उड़न खटोला

इजरायल के वैज्ञानिकों ने रिमोट संचालित एक ऐसा उड़नेवाला स्ट्रेचर बनाया है जो पलक झपकते ही घायलों को अस्पताल पहुंचा देगा। न दूरी की दिक्कत, न जाम का झंझट और न ही दुर्गम इलाकों का खौफ। खूबियों से भरे इस उड़नखटोला स्ट्रेचर का नाम Med-Evacuation Aerial Vehicle है। यह अत्याधुनिक तकनीकी वाला वाहन अपनी जगह से उड़ान भर सकता है। लगातार तीन घंटे तक उड़ान भरने वाले भौरें के आकार के इस वाहन में चार पहिए हैं जो असमतल सतह को भी पार कर सकते हैं। क्या आप जानते हैं कि गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को अगर 60 मिनट के भीतर अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो उसके जीवित बचने की संभावना छह गुना बढ़ जाती है। समय से इलाज न मिलने के कारण भारत सहित कई देशों में लाखों लोगों को असमय जान गंवानी पड़ती है। लेकिन अब घायलों को समय पर इलाज दे पाना संभव होगा।

इजरायली वैज्ञानिकों द्वारा विकसित इस मानव रहित बचाव यंत्र से दूसरों की जान जोखिम में डाले बिना युद्ध-क्षेत्र से घायल सैनिकों को सुरक्षित निकाला जा सकता है। इसमें चार घायल व्यक्तियों को ले जाने की व्यवस्था है। इसको आकार देने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि जंग के अलावा भयंकर दुर्घटनाओं में इसकी उपयोगिता को ध्यान में रखकर भी इसका डिजाइन तैयार किया गया है। ऐसे दुर्गम दुर्घटना स्थल, जहां हेलीकाप्टर और एंबुलेंस घायलों के पास तेजी से पहुंचने में असक्षम हैं, वहां भी यह वाहन पहुंच जाएगा। मानव रहित ड्रोन की तरह काम करने वाले इस स्ट्रेचर को जमीन पर मौजूद एक विशेषज्ञ पायलट उड़ाएगा। अपने गंतव्य स्थल पर पहुंचते ही इसके अंदर मौजूद डाक्टर या चिकित्साकर्मी दुर्घटना में घायलों को स्ट्रेचर पर डालकर अस्पताल में इलाज के लिए वापस भेज देता है।

इस उड़नखटोला स्ट्रेचर को इजरायल के Fisher Institute for Air & Space Strategic Studies के विशेषज्ञों ने तैयार किया है। इस खोज के पीछे इन लोगों का मूल मकसद यह है दुर्घटना के बाद Golden Hour माने जाने वाले 60 मिनट के समय में ज्यादा से ज्यादा घायलों की जान बचाई जा सके। इस उड़ने वाले स्ट्रेचर के प्रोटोटाइप का सफलतापूर्वक परीक्षण किया जा चुका है। अगले साल तक यह बाजार में उपलब्ध होगा।

ज़्यादा जानकारी यहाँ पायी जा सकती है।

विज्ञान का चमत्कार